मदद: अफगानिस्तान में आर्थिक संकट के चलते न तो रोजगार है और न ही कोई काम, ऊपर से तालिबान का खौफ अलग से है। ऐसे में देश छोड़कर जाने वालों की संख्या काफी बढ़ी है। भीषण आर्थिक और सामाजिक संकट से जूझ रहे अफगानिस्तान में इस समय हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। गरीबी, भुखमरी और बेरोजगारी से जूझ रहे अफगानिस्तान में लोगों का जीवनयापन काफी मुश्किल साबित हो रहा है।
ऐसे में देश के लोगों का कोरोना व कोरोना के नए वैरिएंट ओमिक्रॉन वैरिएंट से बचना काफी मुश्किल माना जा रहा है। हालांकि, पाकिस्तान-चीन से उलट भारत इस मुश्किल हालात में अफगान लोगों की मदद के लिए आगे आया है। भारत ने एक जनवरी को अफगानिस्तान को कोविड रोधी टीके की 5 लाख खुराकों की आपूर्ति की थी।
भारत ने अफगानिस्तान को शुक्रवार को मानवीय सहायता के तहत दो टन जीवन रक्षक दवाओं की तीसरी खेप भेजी। विदेश मंत्रालय के बयान के अनुसार, मानवीय सहायता के तहत जीवन रक्षक दवाओं की यह खेप काबुल स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल को सौंपी गई। वहीं, भारत की ओर से दी जा रही मदद का तालिबान सरकार के प्रवक्ता जबीहुल्ला मुजाहिद ने स्वागत किया और भारत सरकार को शुक्रिया कहा।
मंत्रालय ने बताया, भारत, अफगानिस्तान के लोगों के साथ विशेष संबंध जारी रखने और उन्हें मानवीय सहायता प्रदान करने को प्रतिबद्ध है। मंत्रालय ने कहा कि इस प्रयास में हमने हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन के माध्यम से अफगानिस्तान को कोविड रोधी टीके की पांच लाख खुराक और 1.6 टन चिकित्सा सहायता की आपूर्ति की थी। इसमें कहा गया है कि आने वाले हफ्तों में अफगानिस्तान को दवा और खाद्यान्न सहित मानवीय सहायता उपलब्ध कराएंगे।