कोयला भंडार : देश की 70 फीसदी बिजली, कोयले से चलने वाले पावर प्लांट्स से ही बनती है। कोरोना प्रतिबंधों को हटने के बाद से आर्थिक गतिविधियां फिर से तेज हो गई हैं, जिससे बिजली की मांग बढ़ी है। इसके उलट देश के कोयला उत्पादन में कमी आई है। देश के एक तिहाई बड़े ताप बिजली संयंत्रों के पास एक से दस दिन का ही कोयले का स्टॉक बचा है।
इन संयंत्रों में कोयले की तत्काल आपूर्ति के लिए रेल, ऊर्जा और कोयला मंत्रालय के बीच लगातार बैठकें हो रही हैं। मौजूदा स्थिति के कारण भीषण गर्मी में बिजली कटौती से राहत के आसार नहीं हैं। दरअसल, नियमानुसार ताप विद्युत संयंत्रों के पास विद्युत उत्पादन के लिए एक महीने का कोयला स्टॉक होना चाहिए।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमतों में उछाल से आयात में आई कमी और ताप बिजली संयंत्रों में कोयले की आपूर्ति पर पड़े असर के कारण देश के ज्यादातर राज्य बिजली कटौती की समस्या से जूझ रहे हैं। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) की रिपोर्ट के मुताबिक 24 अप्रैल तक देश के 165 बड़े संयंत्रों में करीब एक तिहाई प्लांट कोयले की कमी का सामना कर रहे थे।
इनमें से 24 प्लांट के पास महज शून्य से पांच दिन, तो 30 के पास पांच से दस दिन के ही कोयले का स्टॉक बचा था। पिछले महीने से जारी कोयला संकट के बीच कोयला मंत्रालय लगातार उत्पादन बढ़ाने में लगा है। ताप बिजली संयंत्रों में कोयले की कमी दूर करने के लिए संबंधित मंत्रालयों में लगातार बैठकें हो रही हैं।
कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी ने कहा, कोल इंडिया और इसकी सहायक कंपनियों के पास कोयले का पर्याप्त भंडार है। हम उत्पादन बढ़ाने और समय पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी हितधारकों के साथ लगातार तालमेल बनाए हुए हैं।