दिल्ली: गुरुवार को गृहमंत्री अमित शाह दिल्ली विश्वविद्यालय में शुरू हुए तीन दिवसीय इंटरनेशनल सेमिनार में साफ शब्दों में कहा कि विश्वविद्यालयों को वैचारिक संघर्ष का अखाड़ा नहीं बनना चाहिए। डीयू में विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए शाह ने कहा कि विश्वविद्यालयों को विचारों के आदान-प्रदान का मंच बनना चाहिए, न कि वैचारिक संघर्ष का स्थान।
गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि धारा 370 और 35ए हटाने की बात पर लोग सालों से डराते थे। कहते थे कि कैसे कोई इसे हटा सकता है, क्या- क्या हो जाएगा। बोले कि “मोदी जी ने इसे चुटकी बजाते हुए कर दिया और जो लोग कहते थे कि खून की नदियां बह जाएगी मैं उन्हें कहना चाहता हूं कि मोदी जी की सरकार में खून की नदियां तो क्या कंकड़ भी नहीं चले।
गृह मंत्री शाह ने कहा कि देश में 2014 से लगातार परिवर्तन हुआ है। इसका वाहक दिल्ली विश्वविद्यालय बने। चंद्रशेखर आजाद भी इस विश्वविद्यालय में रहे। मैं मानता हूं यह यूनिवर्सिटी आने वाले वर्षों तक अपनी पहचान बनाएं रखे। देश की रक्षा नीति का जिक्र करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि मोदी सरकार बनने से पहले देश की कोई रक्षा नीति नहीं थी और यदि वह थी भी तो मात्र विदेशी नीति की छाया के रूप में।
सेना द्वारा की गई सर्जिकल स्ट्राइक व एयर स्ट्राइक का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि भारत ने इनके जरिए बता दिया कि भारत की रक्षा नीति का क्या मतलब है। इसके पहले आतंकियों को हम पर हमले के लिए भेजा जाता था, उरी व पुलवामा हमले भी वैसे ही थे, लेकिन सर्जिकल व एयर स्ट्राइक ने देश की रक्षा नीति के मायने स्पष्ट कर दिए हैं।