यूपी: विधानसभा चुनाव में सबसे बड़ा उलटफेर उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की हार का रहा। केशव को सपा की पल्लवी पटेल ने हराया। पल्लवी अपना दल (कमेरावादी) के बैनर तले राजनीति करती हैं। वह विधानसभा चुनाव में सपा से गठबंधन कर उसके सिंबल से चुनाव मैदान में थीं।
अब भाजपा के कद्दावर पिछड़े वर्ग के नेता केशव प्रसाद मौर्य के सिराथू से चुनाव हारने के बाद उनके राजनीतिक भविष्य को लेकर अटकलों का दौर शुरू हो गया है। बहरहाल केशव अभी विधान परिषद सदस्य हैं। ऐसे में केशव को योगी सरकार में जगह मिलेगी या उन्हें भाजपा की राष्ट्रीय टीम में जिम्मेदारी दी जाएगी, इसका निर्णय पार्टी का शीर्ष नेतृत्व अगले सप्ताह तक करेगा।
खबरों के मुताबिक पिछड़े वर्ग के वोट बैंक को ध्यान में रखकर ही केशव के मुद्दे पर निर्णय लिया जाएगा। दिल्ली में 13 व 14 मार्च को होने वाली बैठक में संघ और भाजपा के शीर्ष नेताओं के स्तर पर केशव को लेकर चर्चा की जाएगी। केशव ने विश्व हिंदू परिषद के जरिए भाजपा की राजनीति में कदम रखा था। संघ और भाजपा के शीर्ष नेताओं के प्रयास से ही पिछड़े वर्ग के बीच केशव की पार्टी के चेहरे के रूप में पहचान स्थापित की गई।