अफगानिस्तान: अफगानिस्तान में आर्थिक संकट के चलते न तो रोजगार है और न ही कोई काम, ऊपर से तालिबान का खौफ अलग से है। ऐसे में देश छोड़कर जाने वालों की संख्या काफी बढ़ी है। भीषण आर्थिक और सामाजिक संकट से जूझ रहे अफगानिस्तान में इस समय हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। अमेरिका की ओर से सैन्य वापसी के एलान और तालिबान की वापसी ने स्थितियों को और जटिल किया है। विदेशी तो विदेशी अफगान नागरिक भी यहां से निकलना चाहते हैं।
रविवार को नई दिल्ली में आयोजित तीसरे भारत-मध्य एशिया संवाद के दौरान भारत सहित मध्य एशिया के पांच देशों ने अफगानिस्तान को तत्काल प्रभाव से मानवीय सहायता प्रदान करने का आह्वान किया। इन देशों ने एक सुर में कहा कि अफगानिस्तान के लोगों को मानवीय सहायता प्रदान की जाए। इन देशों ने कहा कि अफगान क्षेत्र का उपयोग आतंकवादी गतिविधियों को आश्रय देने, प्रशिक्षण देने, योजना बनाने या वित्तपोषण के लिए नहीं किया जाना चाहिए।
पांच मध्य एशियाई देशों में कजाकिस्तान, किर्गिजस्तान, ताजिकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और उजबेकिस्तान शामिल हैं। संवाद के दौरान इन देशों के विदेश मंत्रियों ने कहा कि अफगानिस्तान की संप्रभुता, एकता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की आवश्यकता है। सबने शांतिपूर्ण, सुरक्षित और स्थिर अफगानिस्तान के लिए अपने मजबूत समर्थन को दोहराया।
उद्घाटन भाषण में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने अफगानिस्तान के लोगों की मदद करने के तरीके खोजने पर जोर दिया। जयशंकर ने कहा, ‘हम सभी अफगानिस्तान के साथ ऐतिहासिक और सभ्यतागत संबंध साझा करते हैं। उस देश में हमारी चिंताएं और उद्देश्य समान हैं।