ताजमहल: उत्तर प्रदेश में इन दिनों धार्मिक विवाद बढ़ता चला जा रहा है, वाराणसी के ज्ञानवापी मस्जिद के बाद अब आगरा के ताजमहल से जुड़ा नया विवाद सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में याचिका दाखिल कर दावा किया गया है कि आगरा के ताजमहल में भगवान शिव का मंदिर है। ताजमहल के ऊपरी और निचले हिस्से में 22 कमरे हैं, जिन्हें जो अस्थाई रूप से बंद किया गया है। इन्हीं में से 20 कमरों को खुलवाने की मांग की गई है, जहां मुर्तियां और साक्ष्य मौजूद होने का दावा किया गया है।
ताजमहल के बंद कमरों को खुलवाने के लिए हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच में एक याचिका दायर की गई है। इस पर हिंदूवादी संगठनों ने खुशी जाहिर की है। इसकी खुशी में सोमवार को ताजमहल लड्डू बांटने जा रहे अखिल भारत हिंदू महासभा के कार्यकर्ताओं को पुलिस ने बाहर ही रोक दिया। पुलिस ने उनकी तलाशी ली तो उनके पास डिब्बे मिले, जिनमें लड्डू थे।
नियमानुसार किसी खाद्य पदार्थ के लिए ताजमहल में प्रवेश वर्जित है। इसके चलते हिंदूवादी संगठन के कार्यकर्ताओं को प्रवेश नहीं दिया गया। इस पर कार्यकर्ताओं ने स्मारक के बाहर ही लोगों को लड्डू बांट दिए। अयोध्या के भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ में दायर एक याचिका में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को ताजमहल के बंद 20 कमरे खोलने का निर्देश देने की गुजारिश की गई है ताकि यह पता लगाया जा सके कि वहां हिंदू मूर्तियां और शिलालेख छिपे हैं या नहीं।
याची ने बताया कि उन्होनें चार मई को याचिका दायर की है जिस पर 10 मई को सुनवाई होनी है। याची का कहना है कि ताजमहल से जुड़ा एक पुराना विवाद है। ताजमहल में करीब 20 कमरे बंद हैं और किसी को अंदर जाने की इजाजत नहीं है। डॉ. रजनीश सिंह ने कहा कि ऐसा माना जाता है कि इन कमरों में हिंदू देवताओं और शास्त्रों की मूर्तियां हैं। इसलिए याचिकाकर्ता ने अदालत से राज्य सरकार को एक समिति गठित करने का निर्देश देने की मांग की है जो इन कमरों की जांच करे और वहां हिंदू मूर्तियों या धर्मग्रंथों से संबंधित किसी भी सबूत की तलाश करे।