आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के पीपल मंडी के सिंगी गली स्थित खाली प्लॉट के पास में ही खंडहर भी है। यहां से सुबह घूमने के लिए गुजरने वाले लोगों ने खाली प्लॉट में दवाओं का ढेर देखा जिसमे 50 गत्ता (कार्टन) दवाएं लावारिस हालत में थी, तो लोगों ने पुलिस और डीएम कार्यालय में सूचना कर दी।
इस पर एसटीएफ और औषधि विभाग ने पहुंचकर दवाएं जब्त कीं। जांच के लिए पांच दवाओं के नमूने लिए गए हैं। दवाओं की कीमत करीब 40 लाख रुपये की बताई गई है। जब टीम यहां पहुंची तो कुछ दवाएं बिखरी हुई थीं और बाकी की गत्ते और कट्टों में बंद थी। क्षेत्रीय लोगों का कहना था कि रात में यहां पर यह दवाएं फेंकी गई हैं।
औषधि निरीक्षक राजकुमार शर्मा ने बताया कि सुबह करीब आठ बजे डीएम कार्यालय और पुलिस से जानकारी मिली कि पीपल मंडी के सिंगी गली स्थित खाली प्लॉट में किसी ने दवाओं के गत्ते फेंक दिए हैं। मौके पर जाकर देखा तो यहां पर करीब 50 गत्ते दवाओं से भरे हुए थे। एसटीएफ भी पहुंच गई। इन दवाओं को जब्त करते हुए थाना छत्ता लेकर आए।
यहां इनकी जांच की तो इसमें 45 कंपनियों की करीब 200 तरह की दवाएं मिलीं। इसमें एंटीबायोटिक, दर्द निवारक दवाएं, हड्डी रोग, हृदय रोग, स्त्री रोग समेत अन्य बीमारियों की दवाएं हैं। इसमें इंजेक्शन, स्प्रे और मलहम भी हैं। इनकी कीमत करीब 40 लाख रुपये है। इनको औषधि विभाग के गोदाम में सील कर दिया गया है।
लावारिस दवाओं के तार बीते दिन पकड़े गए फिजीशियन सैंपल की दवाओं की कालाबाजारी करने वाले सोनू अग्रवाल से जुड़े हुए हैं। एसटीएफ की प्रारंभिक जांच में चार और दवा माफिया के साक्ष्य मिले हैं। ये चारों माफिया लंबे समय से दवाओं की कालाबाजारी कर रहे हैं।