समीर वानखेड़े: महाराष्ट्र की जिला जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने एनसीपी नेता नवाब मलिक द्वारा भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) अधिकारी समीर वानखेड़े की जाति को लेकर लगाए गए आरोपों मे वानखेड़ को क्लीनचिट दे दी है। इसके बाद जोनल अधिकारी समीर वानखेड़े ने मंगलवार को राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) के अध्यक्ष विजय सांपला से मुलाकात की।
महाराष्ट्र की जिला जाति प्रमाण पत्र सत्यापन समिति ने शुक्रवार को अपने आदेश में कहा कि भारतीय राजस्व सेवा अधिकारी जन्म से मुस्लिम नहीं थे और यह साबित हो गया है कि वह महार जाति के थे, जो अनुसूचित जाति (एससी) है।
वानखेड़े ने जाति प्रमाण पत्र मामले में क्लीनचिट देने लिए एनसीएसी प्रमुख का आभार जताया। वानखेड़े पर सरकारी नौकरी पाने के लिए फर्जी प्रमाण पत्र जमा करने का आरोप था। मुलाकात के बाद नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (एनसीबी) के मुंबई क्षेत्र के पूर्व प्रमुख वानखेड़े ने कहा, “मैंने 11 महीने तक लड़ाई लड़ी। मेरे पूरे परिवार को इस प्रक्रिया का सामना करना पड़ा। लेकिन मैं सिर्फ इतना कहना चाहता हूं ‘सत्यमेव जयते’। मैं विजय सांपला को प्रक्रिया तेज करने में उनकी भूमिका के लिए धन्यवाद देता हूं।”
समिति का आदेश मिलने के बाद वानखेड़े एक पुलिस स्टेशन पहुंचे। यहां उन्होंने महाराष्ट्र के पूर्व मंत्री नवाब मलिक के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। मलिक ने ही उन पर फर्जी प्रमाण पत्र जमा करने का आरोप लगाया था। उनकी शिकायत के आधार पर मलिक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 500 (मानहानि की सजा), 501 (मानहानिजनक बाद को मुद्रित करना) और अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (अत्याचार की रोकथाम) अधिनियम के प्रावधानों के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई।