सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया: कोरोना के नये वैरिएंट ओमिक्रॉन और कोरोना संक्रमण से बचने के लिए देशव्यापी टीकाकरण अभियान मे बहुत तेजी लाई गयी है, कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट दुनिया के लिए नई समस्या बनकर तैयार हो रहा है। भारत में बच्चों को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए दूसरा वैक्सीन रूपी हथियार मिल गया है।
सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) की कोवोवैक्स को विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) से आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिल गई है। अब भारत में टीके के प्रयोग को लेकर दवा महानियंत्रक (डीसीजीआई) को लिखा गया है। डीसीजीआई से हरी झंडी के बाद इस वैक्सीन को भारतीय बाजार में उतारा जाएगा।
एसआईआई अमेरिकी जैव प्रौद्योगिकी कंपनी नोवावैक्स के लाइसेंस के तहत भारत में इस वैक्सीन का उत्पादन कर रही है। कंपनी की ओर से क्लीनिकल ट्रायल बैच काफी समय से सेंट्रल ड्रग्स लेबोरेटरी (सीडीएल) कसौली भेजे जा रहे थे। वर्तमान में सीडीएल से तीन बैच पास किए जा चुके हैं।
इससे पहले एसआईआई कोविशील्ड का उत्पादन कर रही है। भारत में अब तक कोविशील्ड के करीब 153.13 करोड़ डोज जारी हो चुके हैं। इसी बीच कई कंपनियों का क्लीनिकल ट्रायल भी चला हुआ है। इनके बैच लगातार सीडीएल कसौली आ रहे हैं। बच्चों के लिए कोवोवैक्स वैक्सीन के तीसरे चरण के ट्रायल बैच भी सीडीएल कसौली पहुंचे थे।
यहां ट्रायल बैच को मंजूरी दी गई थी और 18 साल से कम आयु वर्ग पर ट्रायल शुरू हुआ था। ट्रायल पूरा होने के बाद कंपनी ने मंजूरी के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन को प्रस्ताव भेजा था। सीडीएल कसौली के उप सहायक निदेशक डॉ. सुशील साहू ने बताया कि कोवोवैक्स के बैच की जांच पूरी हो चुकी है। यह वैक्सीन अन्य वैरिएंट पर भी असरदार मानी जा रही है। कोवोवैक्स का टीका अन्य टीकों की तरह बाजू पर लगेगा। इसमें स्पाइक नैनो पार्टिकल के साथ सोपबार्क के पौधे से लिए गए एक्सट्रैक्ट का मिश्रण होगा। इंजेक्शन लगने के साथ ही शरीर में रोग प्रतिरोधक तंत्र कोशिकाएं नैनो पार्टिकल को पहचान कर काम शुरू कर देंगी।