कानपुर: उत्तर प्रदेश में शहर के सरकारी अस्पतालों की हालात उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक के विभाग संभालने के बाद भी ठीक नहीं हुए है l आए दिन मरीज इलाज के अभाव से अपनी जान से हाथ धो बैठ रहे है l शहर के अस्पतालों में घायल मरीजों को स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हो पा रहा है l ऐसे ही आलम रोजाना देखने को मिलता है l ऐसा ही ताजा मामला कानपुर के उर्सला अस्पताल में देखने को मिला चार साल के बच्चे को इलाज न मिलने के मामले में डिप्टी सीएम और स्वास्थ्य मंत्री बृजेश पाठक ने लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। वहीं, डीएम ने जांच कमेटी गठित कर दी है और सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं।
बता दें, गुरुवार को दादानगर निवासी विधवा महिला अपने चार साल के बेटे अनुभव का इलाज कराने उर्सला इमरजेंसी आई थी। बच्चे पर अल्मारी गिरने से वह बेसुध हो गया था। यहां तैनात डॉक्टर ने बच्चे को भर्ती करने के बजाय एक्सरे कराने को भेज दिया था। जब महिला एक्सरे करवा कर लाई तो डॉक्टर चले गए। बड़ी मुश्किल से दूसरे डॉक्टर मिले, तो उन्होंने बच्चे को देखते ही हैलट ले जाने को कह दिया था।
उर्सला में चार साल के मासूम को इलाज न देने और मां को घंटों भटकाने का मामला डिप्टी सीएम व स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने संज्ञान लिया है। उन्होंने ट्वीट कर उर्सला के निदेशक को लापरवाही बरतने वालों पर सख्त कार्रवाई करने को कहा है। साथ ही उर्सला में दोबारा ऐसा न हो इसके लिए अस्पताल प्रशासन को सजग रहने के निर्देश दिए हैं। कार्रवाई के बाद शुक्रवार को उर्सला इमरजेंसी में आने वाले मरीजों के इलाज की व्यवस्था में सुधार नजर आया।
वहीं डीएम नेहा शर्मा ने मामले में जांच कमेटी गठित कर दी। कमेटी ने उर्सला पहुंचकर सीसीटीवी कैमरों के फुटेज खंगाले। इस मामले में उर्सला के निदेशक दो वार्ड ब्वाय को पहले ही निलंबित कर चुके हैं। लापरवाही बरतने पर ड्यूटी डॉक्टर डॉ. केएन कटियार, डॉ. प्रवीण कुमार सक्सेना और फार्मासिस्ट सत्येंद्र सिंह और संजय यादव के खिलाफ कार्रवाई के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के महानिदेशक को भी लिखा है।