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राष्ट्रपति चुनाव: द्रौपदी मुर्मू की जीत हुई लगभग तय, मिल सकते हैं 61 फीसदी मत, सांसदों को हरे रंग, विधायकों को गुलाबी रंग के मत पत्र मिलेंगे

राष्ट्रपति चुनाव: चुनाव आयोग की ओर से घोषित कार्यक्रम के मुताबिक, 18 जुलाई को देश के सर्वोच्च पद यानी राष्ट्रपति के लिए 18 जुलाई को वोटिंग है। राष्ट्रपति चुनाव जैसे-जैसे नजदीक आते जा रहे हैं, वैसे-वैसे सियासी गतिविधियां भी बढ़ती जा रही हैं। राजग उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू की जीत लगभग तय मानी जा रही है।

द्रौपदी मुर्मू को बीजद, वाईएसआर कांग्रेस, बसपा, टीडीपी, जदएस, शिरोमणि अकाली दल, शिवसेना और झारखंड मुक्ति मोर्चा जैसे विपक्षी दलों के समर्थन के एलान से माना जा रहा है कि उन्हें 61 फीसदी मत मिल सकते हैं। ऐसे में देश को पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति मिलने की उम्मीद पुख्ता है। राजग उम्मीदवार के पास कुल 10,86,431 मतों में से 6.67 लाख से अधिक मत हैं। इनमें 3.08 लाख वोट सत्तारूढ़ भाजपा और उसके सहयोगी दलों के हैं।

बीजद के करीब 32,000 मत हैं, जो कुल मतों का करीब 2.9 प्रतिशत है। ओडिशा की 147 सदस्यीय विधानसभा में सत्तारूढ़ बीजद के 114 विधायक हैं, जबकि भाजपा के 22 विधायक हैं। लोकसभा में बीजद के 12 और राज्यसभा में 9 सदस्य हैं। मुर्मू को अन्नाद्रमुक (17,200 वोट), वाईएसआर कांग्रेस पार्टी (करीब 44,000 वोट), तेलुगू देशम पार्टी (करीब 6,500 वोट), शिवसेना (25,000 वोट) और जदएस (करीब 5,600 वोट) का भी समर्थन मिल रहा है। हाल में संपन्न राज्यसभा चुनावों के परिणाम के बाद उच्च सदन में भाजपा सदस्यों की संख्या 92 हो गई है। लोकसभा में उसके 301 सदस्य हैं।

मुर्मू अगर राष्ट्रपति चुनी जाती हैं तो स्वतंत्रता के बाद जन्मी इस शीर्ष पद पर पहुंचने वाली पहली नेता होंगी।bराष्ट्रपति पद के लिए 18 जुलाई को होने वाले चुनाव में संसद सदस्यों और राज्यों की विधानसभा के सदस्यों को अलग-अलग रंग के मत पत्र मिलेंगे। सांसदों को हरे रंग जबकि विधायकों को गुलाबी रंग के मत पत्र मिलेंगे। एक विधायक के मत की कीमत उस राज्य की आबादी पर निर्भर करती है।

उत्तर प्रदेश में प्रत्येक विधायक के मत की कीमत 208, झारखंड और तमिलनाडु की 176, महाराष्ट्र के विधायक की 175, सिक्किम के विधायक की सात, नगालैंड के नौ और मिजोरम के विधायक के मत की कीमत 8 है। जम्मू-कश्मीर में विधानसभा के अस्तित्व में न होने के चलते इस बार सांसदों के मत की कीमत 708 से घटकर 700 रह गई है। ऐसे में अलग-अलग रंग के मत पत्र होने से रिटर्निंग अधिकारी को गणना करने में मदद मिलेगी।

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