फरेंदा /महाराजगंज: आदर्श नगर पंचायत आनंद नगर में अस्पताल सील होने के बाद भी संचालकों पर क्यों नहीं हो रही कार्रवाई फरेंदा कस्बे में स्थित आनंद एक्स-रे एवं क्लीनिक पर बुधवार को छापेमारी हुई थी। जिसमें क्लीनिक का कागजात रिनुवल नहीं था। अस्पताल में संचालित मेडिकल स्टोर भी बिना पंजीकरण के चल रहा था ।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग ने छापेमारी कर क्लीनिक को सील कर दिया ।लेकिन संचालक के ऊपर कोई भी कार्यवाही नहीं किया। आपको बता दें की क्लीनिक पर डा. बलराम शर्मा एक्सरे के साथ अल्ट्रासाउंड भी करते हैं। बिना कागजात के वह कई वर्षों से लगभग प्रतिदिन सैकड़ों मरीजों का इलाज कर रहे हैं। हालांकि छापेमारी के बाद सीएचसी अधीक्षक ने बताया कि अस्पताल पर डा. बलराम शर्मा के दामाद जो चिकित्सक हैं वह बैठते हैं। यहां सबसे बड़ी बात यह है। कि वर्षों से यहां डा. बलराम शर्मा मरीजों का इलाज कर रहे हैं।
लेकिन उनके दामाद को कभी क्लीनिक पर किसी ने नहीं देखा है। बोर्ड पर तमाम चिकित्सकों के नाम के साथ उनकी डिग्रियां भी लिखी हुई है। लेकिन हॉस्पिटल के संचालक डा. बीआर शर्मा के नाम के आगे उनकी डिग्री नहीं लिखी हुई है। यहां यह भी जांच का विषय है। कि यह कौन सी डिग्री लेकर एक्सरे और अल्ट्रासाउंड के साथ मरीजों की हड्डियों को जोड़ रहे हैं। फिलहाल स्वास्थ्य विभाग भी डा. बलराम शर्मा का पक्ष लेते दिखाई दे रहे हैं।
उनके हिसाब से क्लीनिक के कागजात सिर्फ रिनुअल नहीं हुए हैं। Erra News India के पत्रकार से दूरभाष पर बात करते हुए बनकटी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीक्षक डॉक्टर एमपी सोनकर ने बताया कि उनके कागजात रिनुअल नहीं है ।और मेडिकल स्टोर का लाइसेंस नहीं है । वही जब पूछा गया कि आखिर 2017 के बाद से ही लाइसेंस का रिनुअल ना होने के वजह पर क्या संचालक के ऊपर भी कार्रवाई होगी ।
इस मामले में लीपापोती करते हुए बताया कि बस रिनुअल नहीं था। अब ऑटो रिनुअल हो रहा है।ऐसे में क्या संचालक के ऊपर कोई कार्रवाई नहीं बनती है ।आखिर क्यों हमेशा अस्पतालों को सील कर संचालकों के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं होती है। क्यों हमेशा की तरह लीपापोती कर दी जाती है। यह हमेशा की तरह एक सवाल ही बना हुआ है। वहीं सीएमओ एके श्रीवास्तव ने कहा कि मामला अभी हमारे तक नहीं आया है। देखते हैं। क्या मामला है तब कुछ आपको बता पाएंगे ।
आखिर इतनी बड़ी छापेमारी की जा रही है, और सीएमओ के संज्ञान में नहीं है । वही ड्रग इंस्पेक्टर हमेशा की तरह मेडिकल स्टोर का लाइसेंस न होने के बाद भी अभी जांच पड़ताल ही कर रहे हैं। देखते हैं आगे अब क्या होना हैं।या हमेशा की तरह यह भी जांच ठंडे बस्ते में चला जाएगा ।