मुंबई: बुधवार को मुंबई के पूर्व एनसीबी निदेशक समीर वानखेड़े ठाणे के कोपरी पुलिस थाने में पूछताछ के लिए पेश हुए। उनके खिलाफ महाराष्ट्र के आबकारी विभाग ने धोखाधड़ी का केस दर्ज कराया है। उन पर आरोप है कि उन्होंने वर्ष 1996-97 में बार लाइसेंस हासिल करने के लिए कथित तौर पर धोखाधड़ी की थी।
महाराष्ट्र हाईकोर्ट ने वानखेड़े को इस केस में 28 फरवरी तक अंतरिम राहत दी है। ठाणे पुलिस ने बार लाइसेंस से जुड़ी इस धोखाधड़ी के मामले में वानखेड़े को समन भेजकर 23 फरवरी को संबंधित दस्तावेजों के साथ अपना बयान दर्ज कराने के लिए थाने तलब किया था। ठाणे के कोपरी थाने में दर्ज कराई गई एफआईआर के मुताबिक, वानखेड़े ने अपनी उम्र के बारे में गलतबयानी करके बार के लिए लाइसेंस प्राप्त किया था। 1996-97 में उनकी आयु 18 वर्ष से कम थी और वे लाइसेंस के लिए योग्य नहीं थे। इसके बावजूद, उन्होंने ठाणे के सद्गुरु होटल के लिए अपने अनुबंध में अधिक उम्र बताई थी।
समीर वानखेड़े के सद्गुरु होटल के लिए 1997 में दायर लाइसेंस के आवेदन में उम्र को गलत तरीके से पेश किया था। ठाणे के आबकारी अधीक्षक और वानखेड़े के वकील को सुनने के बाद होटल के लाइसेंस को रद्द करने के लिए छह पेज का आदेश पारित किया था। इस बार को शराब की बिक्री की अनुमति दी गई थी। वानखेड़े ने इस मामले में ठाणे पुलिस द्वारा प्राथमिकी रद्द करने की मांग करते हुए बॉम्बे हाईकोर्ट का रुख किया है। हाईकोर्ट ने उन्हें 28 फरवरी तक अंतरिम राहत दी है।