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विधान परिषद चुनाव : विधानसभा चुनाव के बीच विधान परिषद का भी चुनाव राजनीतिक दलों के साथ पुलिस के लिए भी बना दोहरी चुनौती

विधान परिषद चुनाव : इस समय उत्तर प्रदेश में सभी राजनीतिक दल विधानसभा चुनाव की तैयारी में जुटे हुए हैं l इसी बीच निर्वाचन आयोग ने विधान परिषद के चुनाव की तारीखों का भी ऐलान कर दिया है l इस वजह से राजनीतिक दलों के सामने एक बड़ी चुनौती भी आ गई है l ऐसे में नेताओ का मानना है कि निर्वाचन आयोग को इसके बारे में फिर विचार करना चाहिए l

नेताओ की माने तो यूपी के राजनीतिक इतिहास में पहली बार होगा जब एक ही दिन विधानसभा और विधान परिषद दोनों के लिए मतदान होंगे l प्रदेश में पहली बार विधानसभा चुनाव के साथ होने जा रहे विधान परिषद चुनाव को लेकर पुलिस महकमे की भी चुनौतियां बढ़ गई हैं। पहले जहां सिर्फ विधानसभा चुनाव की गहमागहमी थी वहीं अब विधान परिषद के चुनाव घोषित होने से सरगर्मी और भी बढ़ गई है। विधान परिषद चुनाव में 35 एमएलसी चुने जाएंगे।

चुनाव दो चरणों में 3 और 7 मार्च को होंगे। इसे लेकर राजनैतिक दलों के साथ ही पुलिस महकमे के सामने भी नई चुनौती है। अभी तक इस चुनाव में सत्तारूढ़ दल का दबदबा होता रहा है। इसमें बड़ी भूमिका पुलिस और प्रशासन की रहती है। लेकिन विधानसभा चुनाव के साथ इस चुनाव की घोषणा ने सारे समीकरण बिगाड़ दिए हैं। पुलिस और प्रशासन पर किसका कितना दबाव काम करेगा, यह तो समय बताएगा लेकिन यह तय है कि सभी प्रमुख दल इस चुनाव को जीतने के लिए अपनी पूरी ताकत झोंक देंगे।

इस चुनाव में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव के चयनित सदस्य इसमें मतदान करते हैं। यानी इस चुनाव में बीडीसी से लेकर ग्राम प्रधान और जिला पंचायत सदस्य मतदान करेंगे। इस बारे में अपर पुलिस महानिदेशक कानून व्यवस्था प्रशांत कुमार का कहना है कि पुलिस ने पहले भी कई तरह की चुनौतियों का सामना सफलता पूर्वक किया है, और इस चुनौती से भी अच्छे से निपटेंगे। उन्होंने कहा कि यह चुनाव डायरेक्ट नहीं होता। इस लिए फोर्स की उतनी अधिक जरूरत नहीं पड़ती जितनी विधानसभा आम चुनाव में पड़ती है। सोमवार से इसकी तैयारियां भी शुरू कर दी जाएंगी।

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