महराजगंज। महिला जिला अस्पताल महराजगंज में स्वास्थ्य सेवाएं सवालों के घेरे में हैं। अस्पताल पर आरोप है कि यहां इलाज के नाम पर मरीजों से खुलेआम लूट की जा रही है और सरकारी सुविधाओं को जानबूझकर बेकार दिखाया जा रहा है।
सूत्रों के अनुसार अस्पताल में तैनात डॉक्टर रूपाली श्रीवास्तव द्वारा मरीजों के पर्चे अस्पताल के अंदर न लिखकर बाहर से लिखवाए जा रहे हैं। मरीजों को सरकारी दवाइयों के बजाय बाहर की मेडिकल दुकानों से महंगी दवाइयां खरीदने के लिए मजबूर किया जा रहा है। आरोप है कि इसके बदले डॉक्टर को मोटा कमीशन मिलता है।
मामला यहीं तक सीमित नहीं है। मरीजों का कहना है कि अल्ट्रासाउंड और खून की जांच जैसी जरूरी जांचें भी अस्पताल में उपलब्ध होने के बावजूद बाहर के निजी सेंटरों से कराई जा रही हैं। गर्भवती महिलाओं को खास तौर पर डराकर कहा जाता है कि अगर बाहर से जांच नहीं कराई गई तो बच्चे को खतरा हो सकता है।
पीड़ितों का आरोप है कि अस्पताल में मौजूद अल्ट्रासाउंड मशीन और लैब की सुविधाओं को जानबूझकर अनुपयोगी बताया जाता है, ताकि मरीजों को तयशुदा निजी जांच केंद्रों की ओर भेजा जा सके। इससे हर जांच पर मोटी कमीशनखोरी का खेल चल रहा है।
स्थानीय लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पताल गरीब और जरूरतमंद महिलाओं के लिए होता है, लेकिन यहां उन्हें निजी अस्पतालों से भी ज्यादा खर्च उठाने को मजबूर किया जा रहा है। कई महिलाओं ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पैसे न होने पर उनके साथ अभद्र व्यवहार किया गया और इलाज में टालमटोल की गई।
यह पूरा मामला न केवल स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, बल्कि सरकारी योजनाओं और जनता के भरोसे के साथ भी सीधा खिलवाड़ है। अब बड़ा सवाल यह है कि जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग कब इस गंभीर मामले पर संज्ञान लेगा।
जनता की मांग है कि पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, सीसीटीवी फुटेज और पर्चों की जांच हो, तथा दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि महिला जिला अस्पताल को दोबारा भरोसेमंद बनाया जा सके।
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