बिजली संकट: देश के कई मैदानी इलाकों में इस समय भीषण गर्मी पड़ रही है। वहीं, कोयले की कमी के चलते कई राज्यों में लोगों को बिजली कटौती का सामना भी करना पड़ रहा है। देश में कोयले की मांग और खपत को देखते हुए केंद्र सरकार ने बिजली उत्पादक कंपनियों को 30 जून तक 190 लाख टन कोयला आयात करने के निर्देश दिए हैं। अक्तूबर तक 379 लाख टन कोयला आयात किया जाएगा।
केंद्र बिजली की कीमत स्थिर रखने के लिए कोयला आयात को प्रोत्साहित नहीं कर रहा। कंपनियां भी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयले की कीमत अधिक होने की वजह से आयात करने से बच रही हैं। कोल इंडिया ने देश में रिकॉर्ड कोयला उत्पादन किया है, फिर भी मांग की तुलना में आपूर्ति 7.6 फीसदी कम रही।
दूसरी तरफ कोयले की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में भारी उछाल की वजह से आयात में कटौती भी मुसीबत का सबब बनी है। अप्रैल से शुरू हुआ बिजली संकट छह वर्ष में सबसे गंभीर है। बिजली उत्पादकों के पास कोयले के स्थानीय भंडार नौ वर्ष के न्यूनतम स्तर पर हैं, जबकि बिजली की मांग में चार दशक में सबसे ज्यादा उछाल देखा गया है।
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कोयला महंगा होने की वजह से कंपनियां कोयले के आयात से कतरा रही हैं। बीते तीन माह के दौरान ही कोयले का आयात 42 लाख टन से घटकर 24 लाख टन रह गया है। हालांकि, केंद्र सरकार ने सार्वजनिक बिजली उत्पादक कंपनियों को अपने स्टॉक का कम से कम 10 फीसदी व निजी कंपनियों को 4 फीसदी कोयला आयात करने का आदेश दिया है। इसके तहत कंपिनयों को अक्तूबर तक कुल 379 लाख टन कोयला आयात करना होगा।