अहम समझौते: रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन सोमवार को 21वें भारत-रूस वार्षिक बैठक में भाग लेने चंद घंटों की भारत यात्रा पर पहुंचें। दिलचस्प है कि कोरोना काल के बाद पुतिन किसी देश के साथ द्विपक्षीय वार्ता के लिए पहली बार दौरे पर रूस से बाहर निकले। यह अब तक का भारत आने वाले किसी राष्ट्राध्यक्ष का सबसे छोटा दौरा रहा और 28 समझौतों तथा सहमतियों पर उनका प्रतिनिधिमंडल दस्तखत करके मास्को लौट गया।
चीन के साथ लद्दाख के मुद्दे पर तनाव को लेकर भी रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की चर्चा हुई, लेकिन विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने कहा कि वह इसके बारे में और ज्यादा कुछ नहीं बता पाएंगे। दोनों शिखर नेताओं ने अफगानिस्तान से लेकर आतंकवाद और सभी संभावित द्विपक्षीय, क्षेत्रीय, अंतरराष्ट्रीय मुद्दों पर बात की।
प्रधानमंत्री मोदी ने स्टील क्षेत्र में रूस को निवेश के लिए आमंत्रित किया है। इसके अलावा खाना बनाने वाले कोयला, गैस, हाइड्रोकार्बन समेत तमाम क्षेत्रों में भारत ने रुचि दिखाई है। दोनों देशों की चर्चा में परमाणु ऊर्जा, संस्कृति, व्यापार, साइबर सुरक्षा, जिओलॉजिकल सर्वे, विज्ञान एवं तकनीकी समेत क्षेत्रों में सहमति बनी है।
विदेश सचिव हर्ष वर्धन श्रृंगला ने बताया कि इस दौरान दोनों देशों ने कुछ 28 समझौतों और आपसी सहमति पत्रों पर दस्तखत किए हैं। श्रृंगला ने कहा कि निश्चित रूप से यह राष्ट्रपति पुतिन का बहुत छोटा दौरा था, लेकिन इस दौरान बहुत व्यापकता के साथ तमाम मुद्दों और बहुआयामी फलक पर चर्चा हुई।
दोनों देशों ने रिश्ते की गहराई को बढ़ाने की दिशा में अपने प्रयासों को तेजी से बढ़ाया है। रूस के रक्षा और विदेश मंत्री ने हमारे रक्षा और विदेश मंत्री अगले साल रूस आने के लिए आमंत्रित किया है।