श्री लंका: भारत ने पड़ोसी धर्म निभाते हुए इस साल जनवरी से श्रीलंका की आर्थिक मदद की है। श्रीलंका अपने इतिहास में पहली बार विदेशी कर्ज चुकाने में विफल रहा था। देश लगभग कंगाल हो चुका है। शनिवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर ने श्रीलंका की स्थिति पर संसदीय सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की।
उन्होंने कहा कि बैठक में इस कठिन समय में पड़ोसी देश के साथ खड़े होने की आवश्यकता पर सभी ने एकजुटता से समर्थन दिया। बैठक में विदेश राज्य मंत्री वी मुरलीधरन, मीनाक्षी लेखी और राजकुमार रंजन सिंह भी शामिल हुए। जयशंकर ने कहा कि भारत की ओर से श्रीलंका की मदद के लिए की गई चर्चा सार्थक रही।
श्रीलंका 1948 में ब्रिटेन से आजादी मिलने के बाद से सबसे भीषण आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। श्रीलंका सरकार ने कहा है कि हम इस कठिन समय में आईएमएफ की नीतियों का समर्थन करते हुए मदद चाहते हैं। श्रीलंका आईएमएफ समेत विश्व के अन्य संस्थानों से चार-पांच अरब डॉलर की सहायता चाहता है।
श्रीलंका विदेशी मुद्रा के घोर संकट के कारण ही वह डिफॉल्टर बना। अप्रैल में उसने एलान किया था कि वह इस साल 7 अरब डॉलर के विदेशी कर्ज की अदायगी टाल दी है। उसे 2026 तक कुल 25 अरब डॉलर का कर्ज चुकाना है। उस पर कुल 51 अरब डॉलर का कर्ज है।