नगालैंड हिंसा मामला: चार दिसंबर को हुई नगालैंड हिंसा में ग्रामीणों समेत 14 लोगों की मौत के बाद ओटिंग गांव के लोगों ने एक मंच के माध्यम से चार दिसंबर के घटनाक्रम की पूरी कहानी बयां करी है।
यह घटना तब हुई जब कामगार कोयले की खदान से काम करके एक सप्ताह बाद ओटिंग गांव वापस लौट रहे थे। इसके बाद आक्रोशित ग्रामीणों ने सुरक्षाबलों के वाहनों का पीछा किया और उन पर कब्जा करके आग लगा दी।
ग्रामीणों का कहना है कि सुरक्षाबलों ने कोयले की खदान से कामगारों को ले जा रहे ट्रक को रोकने के लिए पहली गोली ट्रक ड्राइवर को मारी थी। इसके बाद पूरे ट्रक को घेर लिया गया और गोलियां बरसा दी गईं।
ओटिंग सिटीजन कार्यालय के मीडिया सेल की ओर से जारी किए गए बयान के तहत ट्रक की विंडस्क्रीन में गोली का छेद मिला है, जो बिल्कुल ड्राइवर की पोजीशन पर है। इससे साफ है कि सुरक्षाबलों की ओर से पहली गोली ड्राइवर को ही मारी गई थी।
मामला समाने आने के बाद केंद्र सरकार की ओर से इस घटना की एसआईटी जांच कराने के लिए राष्ट्रपति को पत्र लिखा गया है। गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में कहा था कि एसआईटी इस घटना की पूरी रिपोर्ट एक महीने के अंदर पेश करेगी। वहीं असम राइफल्स ने भी इस घटना पर खेद जताते हुए कोर्ट ऑफ इंक्वायरी कराने के आदेश जारी कर दिए हैं।