मध्य प्रदेश: नेशनल टाइगर कंजर्वेशन ऑथोरिटी (NTCA) की रिपोर्ट बताती है कि 2012 से 2020 के बीच मध्य प्रदेश में 202 बाघों की मौत हुई है। मध्य प्रदेश के वन मंत्री कुंवर विजय शाह ने लिखित में यह जानकारी मध्य प्रदेश विधानसभा में दी है कि मध्य प्रदेश में अलग-अलग कारणों से पिछले चार साल में 32 शावकों सहित 85 बाघों की मौत हुई है।
कांग्रेस विधायक ने पूछा था कि राज्य में 2018-19 से 2021-22 के बीच चार साल में कितने बाघों की मौत हुई है। विधायक ने यह भी पूछा था कि अलग-अलग रिजर्व से कितनी बाघ बाहर निकले हैं। इस पर शाह ने बताया कि फॉरेस्ट कॉरिडोर में बाघों का मूवमेंट सामान्य बात है। बाघ खाने, साथी, बेहतर आवास और नए इलाकों की तलाश में अन्य कॉरिडोर में मूवमेंट करते हैं।
मंत्री ने सदन में यह भी बताया कि राज्य सरकार ने 2018-19 में बाघों के संरक्षण, सुरक्षा और निगरानी में 283 करोड़ रुपये खर्च किए हैं। 2019-20 में 220 करोड़ और 2020-21 और 2021-22 में क्रमशः 264 करोड़ और 128 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं।
NTCA की वेबसाइट पर उपलब्ध डेटा कहता है कि इस साल जनवरी से दिसंबर तक 38 बाघों की मौत हुई है। मध्य प्रदेश ने 526 बाघों के साथ 2018 की बाघ गणना में टाइगर स्टेट होने का दर्जा एक बार फिर हासिल कर लिया है। यहां कर्नाटक के मुकाबले दो बाघ ज्यादा मिले थे। इससे पहले 2010 में मध्य प्रदेश ने टाइगर स्टेट का तमगा कर्नाटक को खो दिया था।