उपलब्धि: चंद्रयान-2 मिशन के तहत 2019 में चंद्रमा की सतह पर लैंडर व रोवर उतारे जाने थे, लेकिन मिशन का वह हिस्सा विफल रहा था। मिशन का पहला भाग, इसका ऑर्बिटर सफलता से चंद्रमा की कक्षा में स्थापित किया गया। इसमें लगे उपकरण कम से कम 7 साल तक चंद्रमा पर विभिन्न खोजें करते रहेंगे।
इसी बीच भारत के चंद्रयान- 2 मिशन के ऑर्बिटर ने नया खुलासा किया है कि चंद्रमा के सबसे बाहरी आवरण (एक्सोस्फीयर) में ऑर्गन-40 गैस फैली हुई है। इस खुलासे से चंद्रमा की सतह के बारे नई जानकारियां हासिल हो सकेंगी और अध्ययन में मदद मिलेगी। इसरो ने बताया कि वैसे तो चंद्रमा पर इस गैस की मौजूदगी पहले भी मिली थी, लेकिन ताजा खोज में इसके उन क्षेत्रों में होने का पता चला जिसका अनुमान वैज्ञानिकों को पहले नहीं था।
यह खोज आर्बिटर पर मौजूद चंद्रा के एटमोस्फियरिक कंपोजिशन एक्सप्लोरर – 2 (चेस – 2) ने की है। यह एक मास स्पेक्ट्रोमीटर उपकरण है। यह उपकरण तत्वों के घनत्व, उनके मूल केमिकल व मॉलिक्यूल्स के ढांचे आदि को मापने के काम आता है। इसरो की नई खोज के बारे में जियोफिजिकल रिसर्च लेटर्स नामक वैज्ञानिक जर्नल में रिपोर्ट प्रकाशित की गई। इस साल के आखिर में इसरो चंद्रयान-3 मिशन भी भेज सकता है।