कोरोना महामारी: कोरोना महामारी की दूसरी लहर में मार्केट में नकली रेमडेसिविर बेचने का मामला सामने आने के बाद केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मांडविया ने जांच के आदेश दिए गए थे, जिसकी जांच को करने में 3 वैज्ञानिकों ने जान बूझ कर देरी की है। इसके कारण भारत सरकार ने सेंट्रल ड्रग लैब (सीडीएल) के उन तीनों वैज्ञानिकों को सस्पेंड कर दिया है। इसके अलावा भारत के औषधि महानियंत्रक वीजी सोमानी को भी सख्ती बरतने को कहा गया है।
सीडीएल दवा और टीकों की गुणवत्ता परखने के लिए भारत की सबसे बड़ी लैब है। आधिकारियों के अनुसार, अब पता चला है कि निलंबित किए गए तीनों वैज्ञानिकों ने जानबूझकर रेमडिसिविर के गुणवत्ता परीक्षण में देरी की। इस लैब में दवाओं की गुणवत्ता रिपोर्ट समय पर दी जाती है और कोरोना काल में ये रिपोर्ट और जल्द दिए जाने के निर्देश थे।
लेकिन इन वैज्ञानिकों ने नकली रेमडिसिविर से संबंधित रिपोर्ट 9 महीने की देरी से दी। जून 2021 को पंजाब पुलिस ने रोपड़ से निकली रेमडेसिविर इंजेक्शन की खेप पकड़ी थी। यह घटनाक्रम उस समय हुआ है जब केंद्रीय औषधि गुणवत्ता नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) में घूसखोरी के आरोप चर्चा में हैं।