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BREAKING NEWS: अमेरिका में 5जी विमानन कंपनियों के लिए बना संकट, लैंडिंग और खतरे भांपने के सिस्टम बिगड़ने का था अंदेशा

अमेरिका में 5जी: नए जमाने की तकनीकों जैसे वर्चुअल रियलिटी, खुद चलने वाली कारों, सामान डिलीवर करने वाले ड्रोन, रोबोटिक सर्जरी और टेलीमेडिसिन आदि के लिए 5जी रीढ़ की तरह है। इसके बिना भविष्य की कल्पना संभव नहीं है। मोबाइल नेटवर्क की पांचवीं पीढ़ी यानी 5जी को 4जी से बहुत तेज बताया गया है। इसमें इंटरनेट की गति 10 गुना ज्यादा मिलेगी जबकि लेटेंसी 10 गुना घट कर एक मिली सेकंड रह जाएगी। लेटेंसी मतलब किसी डिवाइस से दूसरे डिवाइस तक डाटा भेजने में लगे समय की वजह से हुई देरी।

अमेरिका में 5जी इंटरनेट सेवाओं के लिए सी-बैंड की 3.70 से 3.98 गीगाहर्ट्ज की फ्रीक्वेंसी का इस्तेमाल हो रहा है। 4.20 से 4.40 गीगाहर्ट्ज यानी इसी फ्रीक्वेंसी के आसपास विमानन कंपनियों के कई उपकरणों की संचार व्यवस्था काम करती है। कंपनियों को अंदेशा है कि दोनों फ्रीक्वेंसी एक-दूसरे को प्रभावित कर सकती हैं।

कंपनियों ने 5जी की वजह से विमानों के अल्टीमीटरों, अन्य संवेदनशील उपकरणों और विजिबिलिटी पर असर का अंदेशा जताया है। उनका कहना है कि उड़ानों की ऊंचाई, अल्टीमीटर की रीडिंग, ऑटोमेटिक लैंडिंग, हवा के बहाव व खतरे आदि पहचानने में उन्हें मुश्किल हो सकती है। धुंध, खराब मौसम और घने बादल होने पर मुश्किलें और बढ़ेंगी।

अमेरिकी दूरसंचार कंपनियों एटीएंडटी व वेरिजॉन ने चिंताओं को नकार दिया है। कहा, 40 देशों 5जी सेवाएं हैं। वहां ऐसी समस्याएं नहीं आईं। जवाब में विमानन कंपनियों ने इन देशों में 5जी व विमानों की संचार फ्रीक्वेंसी में अंतर को ज्यादा बताया। यह तर्क को दूरसंचार कंपनियों ने नकार दिया। मामला इतना बढ़ गया कि अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन को हस्तक्षेप के लिए कहा जा रहा है।

विमानन कंपनियों ने अमेरिकी सरकार को 50 ऐसे एयरपोर्ट की सूची दी है, जिन्हें वे खतरनाक मान रही हैं। इनके निकट दूरसंचार कंपनियों ने 5जी फिलहाल रोका हुआ है। इससे विमान सेवाएं बहाल करने व समाधान तलाशने के लिए कुछ समय मिला है। अमेरिकी सरकार के साथ वहां के कई विभाग, दूरसंचार और विमानन कंपनियां समाधान निकालने को लेकर बातचीत कर रही हैं। हालांकि, समझौता होने में कुछ महीने भी लग सकते हैं।

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