किसान आंदोलन: किसान आंदोलन 2.0 की दस्तक शुरू हो चुकी है। किसानों के दिल्ली कूच के कारण दिल्ली पुलिस ने तनाव को देखते हुए एक महीने के लिए धारा 144 लागू कर दी है। 2020-21 के किसानों के विरोध प्रदर्शन से सबक लेते हुए दिल्ली पुलिस सुरक्षा में किसी भी तरह की लापरवाही नहीं बरत रही है। सिंघू टिकरी और गाजीपुर बार्डर पर पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों को बड़ी संख्या में तैनात की गई है। किसानों के दिल्ली कूच की वजह से सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पुलिस फोर्स गश्त करती रही। तथा सभी से शांति व्यवस्था बनाए रखने की अपील की।
मुजफ्फरनगर में पुलिस ने गाजीपुर बॉर्डर पर धरना-प्रदर्शन के मद्देनजर दो किसान नेताओं को घरों में नजरबंद कर दिया है ताकि वह समर्थकों के साथ दिल्ली में किसानों के प्रदर्शन में शामिल न हो सकें। कुटेसरा और नंगला राई गांवों में दोनों नेताओं के मकानों पर पुलिस बल तैनात किया गया है। भाकियू महात्मा टिकैत के जिलाध्यक्ष साकिर मुखिया नंगला राई और मंडल अध्यक्ष अनुभव त्यागी कुटेसरा के रहने वाले हैं।
भाकियू प्रवक्ता चौधरी राकेश टिकैत ने कहा कि सरकार से तीन साल से कोई बात नहीं हुई। संयुक्त किसान मोर्चा अभी इस आंदोलन में नहीं है, लेकिन अगर किसानों के साथ छेड़छाड़ की गई तो आंदोलन करेंगे। एमएसपी कानून पूरे देश की परेशानी है। बिहार में मंडियां खत्म कर दी गई। बड़ी कंपनियों ने संगठन बनाकर देश पर कब्जा कर लिया है। दिल्ली के लिए कोई एक दिन पहले चल दिया, कोई दो दिन बाद में आ जाएगा। किसान हमसे दूर नहीं और हमसे दिल्ली दूर नहीं।
विभिन्न संगठनों ने कहा कि किसानों को उनका हक मिलना चाहिए। किसानों पर जिस तरह फायरिंग की गई, वह निंदनीय है। साथ ही यह चेतावनी भी दी गई कि हमसे भी दिल्ली दूर नहीं है। अगर किसानों को नुकसान पहुंचाया गया तो पश्चिम यूपी के किसान भी दिल्ली को घेरने से पीछे हटने वाले नहीं है। हर हाल में किसानों को न्याय मिलना चाहिए।