महराजगंज: महराजगंज उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थानम् लखनऊ (भाषा विभाग उत्तर प्रदेश शासन) द्वारा आयोजित 20 दिवसीय संस्कृत भाषा शिक्षण कार्यशाला के तृतीय चक्र का समापन विगत 30 अगस्त को हुआ। संस्कृत संस्थान के अध्यक्ष डॉ०वाचस्पति मिश्र और निदेशक पवन कुमार (आई ए एस) के नेतृत्व और निर्देशन में दिनांक 07-06-2022 को ऑनलाइन गूगल मीट पर हुआ। कार्यक्रम का प्रारंभ वैदिक मंगलाचरण से हुई तत्पश्चात् अतिथिपरिचय एवं स्वागत और ध्येय मन्त्र संस्कृत संस्थान के प्रशिक्षक आचार्य दिवाकर मणि त्रिपाठी द्वारा किया गया। कार्यशाला के समापन में शिक्षण प्रमुख श्री सुधीष्ठ कुमार मिश्र जी उपस्थित रहे और उन्होंने अपने सारगर्भित उद्बोधन् में संस्कृत भाषा की वैधानिकता, वैज्ञानिकता और विशिष्टता के बारे में तथ्यात्मक जानकारी प्रदान की और साथ ही साथ संस्कृत भाषा को सुसंस्कृत समाज निर्माण करने के लिए आवश्यक बताया और नियमित कार्यशाला करने हेतु समस्त संस्कृत अध्येताओं को प्रेरित किया । उसी क्रम में संस्कृत संस्थान लखनऊ के प्रशिक्षक आचार्य दिवाकर मणि त्रिपाठी ने भाषा की हमारे जीवन में क्या आवश्यकता है हमें संस्कृत भाषा क्यों पढ़नी चाहिए इस विषय में तथ्यात्मक जानकारी देते हुए संस्कृत भाषा को सभी भारतीयों के लिए प्राण वायु के समान बताया जैसे वायु के बिना जीवन संभव नहीं उसी प्रकार भारतीयता और भारतीय संस्कृति की कल्पना संस्कृत के बिना संभव नहीं ।

बताते चलें कि अब तक उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के द्वारा ओनलाईन सरल संस्कृत सम्भाषण शिबिर योजना के अन्तर्गत पिछले 12 महीने में प्रथम स्तरीय संस्कृत भाषा शिक्षण के लिये कुल 40042 लोग पञ्जीकृत हुये । जिसमें 15000 से अधिक लोगों को ओनलाईन कक्षाओं के माध्यम से उत्तर प्रदेश संस्कृत संस्थान के 48 प्रशिक्षकों द्वारा शिक्षण किया गया ।
कार्यक्रम मे सौम्या सिंह, आकांक्षा सिंह, बृजेश पाठक, जफरुल इस्लाम, मुशर्रफ, रिटायर्ड आईएएस शिवप्रसाद सिंह सहित संस्थान के पदाधिकारी जगदानंद झा प्रशासनिक अधिकारी, श्रीमती चन्द्रकला शाक्या पर्यवेक्षिका, सुधीष्ठ मिश्र प्रशिक्षण प्रमुख, धीरज मैठाणी प्रशिक्षण समन्वयक आदि सैकड़ों लोग उपस्थित रहे। पुनः आगामी 4 जुलाई से प्रथम स्तरीय भाषा शिक्षण के लिए 70 प्रशिक्षुओ का प्रशिक्षण प्रारंभ होगा।