संकट: अफगानिस्तान में आर्थिक संकट के चलते न तो रोजगार है और न ही कोई काम, ऊपर से तालिबान का खौफ अलग से है। ऐसे में देश छोड़कर जाने वालों की संख्या काफी बढ़ी है। भीषण आर्थिक और सामाजिक संकट से जूझ रहे अफगानिस्तान में इस समय हालात बेहद गंभीर बने हुए हैं। अमेरिका की ओर से सैन्य वापसी के एलान और तालिबान की वापसी ने स्थितियों को और जटिल किया है। विदेशी तो विदेशी अफगान नागरिक भी यहां से निकलना चाहते हैं।
अफगानिस्तान में जब तालिबान कब्जा कर रहा था तो पाकिस्तान उसके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा था। पाकिस्तान ही पहला ऐसा देश था जिसने तालिबान का समर्थन किया था। लेकिन अब अफगानिस्तान बेहद आर्थिक संकट से गुजर रहा है लोगों के पास रोजगार नहीं है, अर्थव्यवस्था भी लगभग गर्त में जा चुकी है।
अमेरिकी सीनेटरों के चार सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का स्वागत करते हुए, पाक पीएम इमरान खान ने यह भी कहा कि दोनों देशों अमेरिका और पाकिस्तान को आतंकवाद से पीड़ित क्षेत्र में सुरक्षा खतरों से निपटने के लिए मिलकर काम करना चाहिए। पाकिस्तान पहुंचे चार सदस्यीय अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल में सीनेटर एंगस किंग, रिचर्ड बूर, जॉन कॉर्निन और बेंजामिन सासे शामिल थे।
वहीं पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने शनिवार को कहा कि अफगानिस्तान में मानवीय संकट और आर्थिक पतन को रोकने के लिए हर संभव उपाय करना चाहिए। अफगान लोगों के लिए शांति, स्थिरता और आर्थिक विकास के साझा उद्देश्यों को बढ़ावा देने के लिए पाकिस्तान और अमेरिका के बीच गहरी भागीदारी होनी चाहिए। पीएम इमरान ने कहा कि दोनों देशों के बीच एक गहरी और मजबूत साझेदारी क्षेत्र की शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी और महत्वपूर्ण है।