लखनऊ: सीएम योगी के निर्देश पर पूरे उत्तर प्रदेश में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों का सर्वे का काम शुरू हो चुका है। इस बीच गैर मान्यता प्राप्त मदरसों के सर्वे के बीच मदरसों को वैध और अवैध बताने की चर्चाओं पर विराम लगाते हुये मदरसा शिक्षा परिषद के चेयरमैन डा. इफ्तिखार अहमद जावेद ने कहा कि मदरसों के साधारण सर्वे को वैध-अवैध का अखाड़ा न बनाया जाए।
उन्होंने मदरसों के सर्वे पर सही शब्दों का चयन करने की अपील की। गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की संख्या बढ़ने पर डा. जावेद ने कहा कि बीते सात सालों से नए मदरसों की मान्यता बंद है, ऐसे में गैर मान्यता प्राप्त मदरसों की गिनती बढ़ना स्वभाविक है। मदरसा बोर्ड के चेयरमैन डा. इफ्तिखार अहमद जावेद ने कहा कि समय-समय पर गैर मान्यता प्राप्त स्कूलों, कालेजों और विश्वविद्यालयों के भी सर्वे होते रहते हैं लेकिन उसकी कोई चर्चा नही होती। मदरसों के सर्वे की बेतहाशा चर्चा ने अजीब सा माहौल बना दिया है।
उन्होंने कौम के चंदे व जकात के पैसे से चलने वाले मान्यता प्राप्त मदरसे और गैर मान्यता प्राप्त मदरसे निशुल्क शिक्षा देकर साक्षरता दर बढ़ाने में सरकारों की मदद कर रहे हैं। डाॅ. जावेद ने कहा कि मदरसों के वैध व अवैध होने की चर्चा कर कुछ लोग मदरसों के बंद होने का डर पैदा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मदरसा प्रबंधन से मेरी अपील है कि वो भयभीत न हों, सरकार सर्वे के माध्यम से मदरसों की सही संख्या, उनकी गुणवत्ता और संचालन का डाटा एकत्र करना चाहती है, ताकि उनके हित में काम किया जा सके।
उन्होंने कहा कि धार्मिक व आधुनिक शिक्षा देने वाले सभी मदरसे वैध हैं। चेयरमैन ने कहा कि तमाम मदरसे मदरसा बोर्ड से मान्यता प्रप्त हैं जो बोर्ड का पाठयक्रम चलाते हैं तो कुछ मदरसे दारुल उलूम नदवतुल उलमा लखनऊ, दारुल उलूम देवबंद और जामिया सल्फिया वाराणसी जैसे शैक्षिक संस्थानों से संबद्घ होकर उनका पाठयक्रम चलाते हुये गरीब कमजोर परिवार के बच्चों को शिक्षित करते हैं।