अफगानिस्तान: भारत और अफगानिस्तान के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंध हैं। अफगानिस्तान पर तालिबान के कब्जे के बाद देश की स्थिति अस्थिर और नाजुक बनी हुई है। अफगानों को भुखमरी और बीमारी के संकट से बचाने के लिए भारत लगातार गेहूं, मेडिकल हेल्प और वैक्सीन की सहायता भेज रहा है।
अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी से पहले भारत दशकों से अफगान सहित भूटान, श्रीलंका, तजाकिस्तान, मालदीव, नेपाल एवं वियतनाम आदि 18 मित्र देशों की सेनाओं के युवा अधिकारियों को प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध कराता रहा है। अब एक बार फिर से तालिबान अपने सैनिकों को भारत में प्रशिक्षण दिलवाना चाहता है।
तालिबान के संस्थापक मुल्ला उमर के बेटे और अफगानिस्तान के सर्वशक्तिमान रक्षा मंत्री मुल्ला याकूब ने सैन्य प्रशिक्षण के लिए अफगान सेना के जवानों को भारत भेजने की इच्छा व्यक्त की है। मुल्ला याकूब ने कहा है कि उन्हें इससे कोई समस्या नहीं है। गौरतलब है कि अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी के पहले अफगानी सेना के जवानों को भारत यहां बेसिक मिलिट्री ट्रेनिंग देता था। साथ ही भारत अफगानिस्तान के सैन्य अधिकारियों को समय-समय पर विभिन्न स्थानों पर विशिष्ट सैन्य प्रशिक्षण भी कराता था, ताकि उनका प्रोफेशनल स्तर ऊंचा उठ सके, लेकिन तालिबान के अफगानिस्तान पर कब्जे के बाद ये बंद हो गया।
मुल्ला याकूब ने कहा कि एक बार फिर तालिबान भारत के साथ संबंधों को बेहतर बनाना चाहता है। उन्होंने भारत में प्रशिक्षण के लिए दोबारा अपने सैनिकों को भेजने की बात पर कहा कि उन्हें इससे कोई आपत्ति नहीं है। भारत-अफगान के बीच संबंध मजबूत हों वे इसके लिए जमीन तैयार करने का काम करेंगे। उन्होंने कहा कि वे भारत सहित सभी देशों के साथ मजबूत राजनयिक संबंध स्थापित करना चाहते हैं।