मिठौरा प्रभारी मणिकांत द्विवेदी की रिपोर्ट
सिन्दुरिया
महाराजगंज: विकास खण्ड मिठौरा अन्तर्गत ग्राम पंचायत बेलवां खुर्द का टोला भंगरहिया में आजादी के सात दशक से ऊपर का समय गुजर जाने के बाद भी आज तक यहाँ के ग्रामीण सड़क , जल निकासी की नाली तथा शुद्ध पेयजल व्यवस्था सहित अन्य मूलभूत सुविधाओं से महरूम हैं ।
बताते चलें कि कहने के लिए तो पेय जल व्यवस्था हेतु गाँव में चार इण्डिया मार्का हैण्डपम्प लगे हुए हैं । किन्तु चारो हैण्डपम्प दूषित जल उगल रहे हैं । जिससे ग्रामीणों को पीने हेतु शुद्ध पानी नसीब नहीं हो पा रहा है । गाँव में पूरब तरफ से मात्र एक रास्ता है जो नहर की पटरी है । गाँव के पश्चिम तरफ के रास्ते को कुछ लोगों ने बंद कर रखा है ।
यहाँ बता दें कि इसी गाँव में निवास करने वाले एक सम्भ्रान्त परिवार द्वारा ब्लॉक प्रमुख मिठौरा के पद पर चार बार रह कर कमान सम्भाली गयी । किन्तु उनके द्वारा भी इस भंगरहिया टोले की सुधि नहीं ली गयी ।
ऐसे में रविवार को जब मिठौरा ब्लॉक के ग्राम पंचायत बेलवां खुर्द के टोला भंगरहिया में पत्रकारों की टीम पहुँची तो वहाँ की जमीनी हकीकत स्पष्ट रूप से नजर आयी । वहाँ के ग्रामीणों ने पत्रकारों की टीम के समक्ष बयां करते हुए कहा कि यह मलीन बस्ती का टोला है । इसी वजह से किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस टोले की सुधि नहीं ली । जिससे यहाँ के ग्रामीणों के मन में काफी रोष व्याप्त है । ग्रामीणों का कहना है कि जब जब चुनाव आता तब तब जनप्रतिनिधि यहाँ के लोगों को मुंगेरीलाल के हसीन सपने दिखाते हैं और चुनाव समाप्त होते ही वे सारे वादे भूल जाते हैं । जिससे यहाँ के ग्रामीणों में काफी रोष व्याप्त है ।
यहाँ के ग्रामीणों ने बताया कि वर्तमान ग्राम प्रधान का एक वर्ष का कार्यकाल बीत गया किन्तु आश्चर्य की बात यह है कि उन्हें आज तक यहाँ के ग्रामीणों की खोज खबर लेने की फुर्सत नहीं मिली । जिसकी वजह से यहाँ की दलित बस्ती के लोगों के मन में काफी पीड़ा है कि वोट हासिल करके जीत जाने के बाद वे यहाँ के लोगों को भूल गए । जिससे आज भी यह टोला आजादी के 75 वर्ष बाद भी विकास की किरण से कोसों दूर है।
यहाँ बताते चलें कि यहाँ के ग्रामीण सुदामा , दिलीप ,अमृता , कृष्णावती , सूरज , मोहन , पन्ने लाल , जमरेश आदि ने जनप्रतिनिधियों की दोहरी राजनीति को लेकर कड़ी आपत्ति जताया है ।
इस सम्बन्ध में ग्राम प्रधान प्रतिनिधि रामनाथ विश्वकर्मा ने बताया कि मुझे ब्लॉक से पैसा नहीं मिलता है तो मैं क्या करूं।